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हिमालयी राज्यों में बाढ़ के लिए कौन है जिम्मेवार?

हिंदू कुश हिमालयी क्षेत्र में पिछले 60 साल के दौरान मौसम के चरम तक पहुंचने की घटनाओं में वृद्धि हुई है

मानव निर्मित जलवायु परिवर्तन की वजह से वैसे तो देश के लगभग सभी राज्यों में मौसम के चरम तक पहुंचने की घटनाओं में वृद्धि हुई है, लेकिन हिमालयी राज्यों में इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है। भारी बारिश व बादल फटने की वजह से अगस्त माह में  पहाड़ी राज्यों में आई विपदा को भी इसका हिस्सा माना जा रहा है।

हिंदू कुश हिमालयी क्षेत्र आठ देशों में लगभग 3500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। इनमें भारत, चीन, नेपाल प्रमुख है। भारत में इस क्षेत्र में दस राज्य आते हैं, जिनमें उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर,सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और असम व पश्चिम बंगाल का पहाड़ी क्षेत्र शामिल है।

इस क्षेत्र को गर्मियों में गर्म स्त्रोत के रूप में जाना जाता है और सर्दियों में गर्म मोरी के रूप में जाना जाने लगा है, जो गर्मियों में भारतीय मानसून को प्रभावित करता है।

लेकिन हिंदू कुश हिमालयी क्षेत्र के पहाड़ वैश्विक औसत के मुकाबले ज्यादा गर्म हो रहे हैं। फरवरी 2019 में इंटरेनशनल सेंटर फॉर इंटिग्रेटेड माउंटेंन डेवलपमेंट (आईसीआईएमओडी) के अध्ययन में यह बात सामने आई।

अध्ययन में पाया गया कि पिछले 60 साल के दौरान इस क्षेत्र में मौसम के चरम तक पहुंचने की घटनाओं में वृद्धि हुई। हर दशक में औसतन 1.7 गर्म रातों की वृद्धि हो रही है, जबकि हर दशक में औसतन 1.2 गर्म दिन की वृद्धि हो रही है। इसी तरह हर दशक में एक सर्द रात और आधा सर्द दिन कम हो रहा है।

इस अध्ययन से आभास होता है कि हिमालयी राज्यों में अत्यधिक बारिश, बाढ़ और बादल फटने की घटनाएं भी बढ़ी है। साथ ही, यहां अत्यधिक लू और बारिश में कमी की घटनाएं भी हो रही हैं।

जुलाई के पहले सप्ताह तक अरुणाचल प्रदेश के कई जिलों में काफी कम बारिश हुई थी, लेकिन जुलाई में सामान्य से काफी अधिक बारिश होने के कारण तवांद और वेस्ट कमेंग में बाढ़ आ गई।

इसी तरह आसाम के चार जिलों धुबरी, कोकराजड़, बोंगाईगांव और बारपेटा में भी सामान्य से काफी अधिक बारिश हुई और अब तक वहां के 6 जिलों में बाढ के हालात हैं। मेघालय में भी जुलाई के मध्य में बाढ़ का प्रकोप देखने को मिला।

उत्तराखंड इन दिनों बाढ़ की चपेट में है। यहां भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं से 20 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि जुलाई के आखिर तक कई जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई थी।

हिमाचल प्रदेश में भी मौसम की अतिशय मार देखने को मिल रही है। भारी बारिश और बाढ़ के कारण अब तक राज्य में 22 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।  जम्मू कश्मीर के कठुआ और सांबा जिले में भारी बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने उत्तराखंड व जम्मू कश्मीर में अगस्त 19  व 20 को भारी से अति भारी बारिश होने का अनुमान जताया है और राज्य में अलर्ट रहने को कहा गया है।

आईसीआईएमओडी की रिपोर्ट में कहा गया है कि पारिस्थितिकी तंत्र में गड़बड़ी व वायु प्रदूषण में वृद्धि की वजह से हिंदू कुश हिमालयी क्षेत्र में तेजी से जलवायु परिवर्तन हो रहा है।

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